बुढ़ार। (भारती जायसवाल )नगर में नरेंद्र तिवारी के निज निवास में इन दिनों श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन चल रहा है। कथा वक्ता पंडित बालकृष्ण पांडे जी के द्वारा कथा का रसास्वादन श्रोताओं को कराया जा रहा है। तीसरे दिन की कथा मुख्य रूप से विदुर व ध्रुव संवाद पर आधारित रहा। श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को कथावाचक पूज्य दिव्या गुरुवार बालकृष्ण पांडे जी ने ध्रुव व विदुर चरित्र की कथा का प्रसंग सुनाया। कथावाचक ने कहा कि अगर ध्रुव पांच साल की उम्र में भगवान को पा सकता है, तो फिर हम कैसे पिछड़ सकते हैं। अगर सच्चे मन से भगवान की भक्ति की जाए, तो भगवान खुद अपने भक्तों से मिलने पहुंच जाते है। कथा के दौरान झांकियां भी सजाई गई। वहीं विदुर प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की व्याकुलता के बारे में उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण विदुरजी की कुटिया में भोजन करने गए और वहां केले के छिलकों का भोग स्वीकारा। इससे पहले वे दुर्योधन के महल में छप्पन भोग का त्याग कर आए थे। भगवान तो प्रेम के भूखे होते हैं और विदुर-विदुरानी ने भगवान को प्रेम से भोजन करवाया तो उन्होंने केले के छिलके भी प्रेम से खा लिए। कथा के दौरान कथावाचक ने श्रद्धालुओं के समक्ष सृष्टि वर्णन के प्रसंग को भी विस्तार से सुनाया। साथ ही कथा में राजा बलि का संदर्भ भी सुनने को मिला। महाराज श्री ने बताया कि भगवान ने असुर राज बलि के अहंकार को तोड़ने और देवताओं को उनका स्वर्ग लौटाने के लिए माता अदिति के गर्भ से जन्म लिया। वामन ने बलि से तीन पग भूमि मांगकर, दो पग में पृथ्वी और आकाश नाप लिया और तीसरा पग बलि के सिर पर रखकर उसे पाताल का राजा बना दिया।
0 Comments